Sunday, April 13, 2008

नजदीकियां....

आप पास रहते हो तो हर बात अच्छी लगती है.....
आपसे दुरी जाने क्यों इतना खलती है....
इतने दिन क्यों आपसे दूर रखा.....
बस खुदा से यही शिकायत रहती है....

नजदीकियां आपसे इतनी हो जायेगी, सोचा न था...
हमें चाहत इतना सताएगी, सोचा न था....
रहते हो दूर तो मिलने की बेताबी रहती है....
और पास रहते हो तो जुबान भी नही खुलती है..

1 comment:

advocate rashmi saurana said...

itani sundar rachanaye ab tak kaise nahi padi mene. khair bhut achha likhate hai. kavitaye bhut bhavuk kar jati hai.