"Love is the thing which is grace of god, and few peoples gets it... u r the most lucky person if someone loves you, however, this world is full of fake... people are cheating in name of love to each other...." so be careful while you love someone kyunki "pathrili hai ye rah aur chikni bhi, jane koun kab fisal jae aur koun kab jakhmi.... ehtiyat hi hai behtarin nuskha... andhe hoke pyar kiya jaye ye duniya us kabil nahi"
Friday, May 29, 2009
इन्तजार....
वो कहते है किसी और का हो चुका तू...
हम कहते है ये 'दिल' सदा से बस तेरा है....
मेरे वादे पे अब उनका ऐतबार न रहा....
जाने हमने क्या वो गुनाह कर दिया...
भले ही अब उनकी नज़रों में मेरी वो तस्वीर न रही....
पर फ़िर भी यकीं है...की उन्हें आज भी इन्तजार सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा है....
Wednesday, May 27, 2009
सच.....
खुदगर्ज़ तो न था मैं.....
पर हालात ने मुझे खुदगर्ज़ साबित कर दिया....
जिस पल को कभी ख्वाब में भी न सोचा था....
जिंदगी ने उस पल को हर पल का सच बना दिया....
काश...
काश की बातों से दिल के जख्म सिल पाते....
काश की दुनिया मे सब चाहने वाले मिल पाते....
फ़िर यूँ न होती ये दुश्वारियां-ऐ-मोहब्बत....
पर सोचो क्या फ़िर इश्क में यूँ रोमान्चियत पाते.....
Friday, May 22, 2009
यु न समझ....
हैं खामोश तो यूँ न समझ की दिल में कोई बात नहीं....
कर रहे हैं मुस्कुरा के बात तो यूँ न समझ दिल में कोई जज्बात नहीं....
तेरी फुरकत किस तरह सह पाएंगे, इसी ख़याल से जान जाने को है......
लबों से कुछ न कह पाए तो यूँ न समझ, की हमे तेरा अंदाज-ऐ-हालात नही...
रह-ऐ-हयात मे कुछ ऐसे भी मोड़ आते है....
जिसके बारे मे कभी सोचा भी नही था....उनके बिना एक पल भी नही सुकून पाते है...
अक्सर किस्मत ऐसे इम्तिहान लेती है....
जिनके न जाने की दुआ करते है.....वो ही सबसे पहले दूर जाके जलाते है.....
Saturday, May 16, 2009
गुफ्तगू....
पर हम ही अपनी मुट्ठी न खोल पाए.....
पैमानों ने तो भरसक कोशिश की छलक जाने की....
पर हम ही अपने लब न खोल पाए....
बहुत कोशिश की तुने अपने जज्बात जताने की....
पर हम ही नासमझ थे..जो न समझ पाए...
हर बात को तेरे अल्फाजों में सुनने की आरजू में उम्र निकाल दी....
पर प्यार में खामोशी भी गुफ्तगू होती है...न समझ पाए....
Friday, May 1, 2009
कसक.....
तुझसे दुरी की तस्सव्वुर भी कर देती मुझे उदास है...
है बस कसक यही की, काश हम बहुत पहले मिले होते...
क्यूंकि तुझसे मिलने से पहले की मेरी हर कहानी बकवास है....
यूँ नही है की पहले मैं इस "कशिश" से नावाकिफ था...
पर तेरी कशिश के आगे वो कशिश बस कयास है....
हर किसी को होती होगी आशिकी इस कायनात में.....
पर यकीं कर मेरी आशिकी अपने आप में ख़ास है...
Friday, April 17, 2009
उल्फत...
एक अरसे से जिस अक्स की सूरत बनाता रहा....
खुदा की रहमत ने वो काम कर दिया....
यह उनकी फराख्त दिली का की सुबूत है...
की उन्होंने ख़ुद को बेनकाब कर लिया....
Wednesday, March 18, 2009
हमसफ़र.....
यूँ ही बस तुझे जानने की चाहत में तेरे इतने करीब आ गए....
की अब तुझसे दूरी का ख्याल भी जानलेवा लगता है....
मुक्क़दर से मिलता है तुझ जैसा हमसफ़र....
हर किसी की किस्मत में ऐसा हमसफ़र कहाँ होता है....
Tuesday, September 30, 2008
वाकये....
राहे उल्फत में मोड़ कुछ ऐसे भी आते हैं,
जिनके बिना एक कदम भी चलना हो मुश्किल
वोही हमे पीछे छोड़ जाते हैं....
पर जिंदगी रूकती नही ऐसे हादसों से ....
बस कुछ देर धीमे और फ़िर बस ....
बिछड़ने वालों के नाम रह जाते हैं....
ऐसा अक्सर और हर एक के साथ होता है....
फ़िर भी कुछ वाकये अक्सर रुला जाते है....
Sunday, September 28, 2008
बीते दिन....
आज पुराने दरख्त ने आवाज़ दी है...
जिसकी छावों में हर दोपहर गुजरा करती थी...
उन शाखाओं ने आवाज़ दी है...
जिनसे बचपन में गिल्ली-डंडा बना करती थी...
गाँव की वो नदी फ़िर बुला रही है मुझे...
जिसमे घंटो अठखेलियाँ करते थे हम...
उन गलियों ने फ़िर से पुकारा है....
जिनमे यु ही बेमकसद घुमा करते थे हम....
आज वो दरख्त अकेला है...
क्यूंकि अब बुड्ढा गया है वो...
वो शाखों पे कोई नही झूलता....
क्यूंकि जर्जर हो गई है वो....
वो नदी भी कुछ उदास सी है....
क्यूंकि अब वो उफान नही रहा उसमे...
भीड़ भाद में भी वो गलियां सुनी सी है...
क्यूंकि किसी के पास रुकने की फुर्सत नही है....
आज फिरसे उन बीते दिनों को जीने की चाह है.....
जिन दिनों के बीत जाने की तब हम दुआ करते थे....
आज फ़िर से वोही बचपन के दिन चाहता है मन...
जिन दिनों में जल्द से जल्द बड़े होने की ख्वाहिश रखते थे....
Friday, September 26, 2008
जुदा है हकीक़त...
एक उम्र निकल गई तुमसे रिश्ता बनाने में,
और एक पल में यूँ जैसे सब कुछ बिखर सा गया...
हम जीते रहे इस मुगालते में की तुम्हे जानते है हम,
पर हकीक़त में तो बस अपनी पहचान भर है....
एक सहारे की तलाश में दर दर भटकते रहे हम....
मिले जब तुमसे तो लगा की वोह तलाश पुरी हुई....
लगने लगा की इश्क हमपे भी मेहरबान हो रहा है अब...
पर हकीक़त में हम वोह खुशनसीब नहीं....
जाने क्यों लगता है की दूर रहके खुश तो तू भी नही...
पर बेरुखी तेरी से भी तेरी मैं अनजान नहीं...
दुनिया की नज़र खटकती है हमें मुस्कुराते देख कर...
पर हकीक़त में न सुकून से हम है, और सुकून से तू भी नहीं....
Sunday, August 31, 2008
बेबसी....
सोचता हूँ की न सोचूं तेरे बारे में...
पर हर सोच तुझ पे ही आके रुक जाती है...
जानता हूँ की अब तेरा कोई वास्ता नही मेरी सोच से...
फ़िर भी मेरी तस्सवुर से तू नही जाती है...
प्यार करो लेकिन एक हद में रहकर...
हर किसी से मुझे ये ताकीद अक्सर मिल जाती है .....
पर दीवानगी किस हद पे जाके जूनून बन जाती है ....
मुझ कमसमझ को ये भी तो नही समझ आती है ....
गिला था कभी तुम्हे...
की आपको तो हमारी याद भी नही आती है.....
और आज आपकी हसरत है की हम आपको भूल जायें...
जबकि ख़ुद किसी बहाने से जेहन में चली आती हैं...
अरमानों को कुचल के अपने...
किसी की खुशी के खातिर मुस्कुराना...
दिल में लेके दर्द के तराने...पर महफ़िल में खुशनुमा गीत गाना...
शायद यही वो हालात है जिंदगी के...जो बेबसी कहलाती है....
Friday, August 8, 2008
प्यार....
सच है प्यार सब कुछ सिखा देता है...
मौत से डरना....जिन्दगी से प्यार करना सिखा देता है...
हम तो चाहते थे हर कदम पर वफ़ा ही करना...
पर ये प्यार ही किसी कदम पे बेवफा भी बना देता है...
Sunday, August 3, 2008
ख्याल....
मसरूफ हो आप दुनियादारी में....
की आपको तो चाहता सारा जमाना है....
पर वो दिल केसे भुला दे आपको....
जिसका हर ख़याल आप हो....
मेरी मुस्कान देख के समझे तुम...
की बहुत खुश-मिजाज हो गया मैं इन दिनों...पर....
पलक नही भिगोते हम....
की कहीं आप न भीग जाओ...
दोस्ती....
तो किसी के लिए पुरी जिंदगानी...
किसी से इतेफाकान हो जाती है...
तो किसी से इरादतन की जाती है...
करो जो दोस्ती तो जान दे के भी निभाना...
हमारी तो बस इतनी कहानी है...
रहें भले ही मीलों के फासले दरमियाँ...
पर दिलों में न दूरियां आनी है.....
Friday, August 1, 2008
तुमसे दूरी...
जीना तेरे बिना दर्द है, बेमानी है....
तुझसे दुरी एक पल की भी बदनसीबी की निशानी है...
खफा भी हो तो कभी २ पल से ज्यादा न होना....
आख़िर तेरी चाहत ही तो मेरी जिंदगानी ...
तुमसे दूर होता हूँ तो...
तो खामोशी मेरी फितरत हो जाती है....
हर किसी सूरत में ....
तुझे तलाशना मेरी फितरत हो जाती है...
हर हरक़त पे चौंकना...
और फ़िर दिल को समझाना मेरी फितरत हो जाती है...
किस तरह बयां करूँ की...
तुम बिन जिन्दगी कितनी बदहाल नज़र आती है....
Saturday, July 12, 2008
मुफलिसी...
तेरे सितम से गमगीन अब भी मेरी शामें है...
ये तो तेरी यादें है, जो मेरी सांसों की डोर थामें है...
तेरी तस्वीर को भी कोई नजर भर के देखे तो कहाँ गवारा था मुझे...
ये तो मेरी मुफलिसी है, जो आज कोई और तेरा हाथ थामें है...
Saturday, July 5, 2008
आज फ़िर...
यूँ मिले तुम पहले से आज....
की दिल का हर अरमान फ़िर से सर उठाने लगा.....
वो ख्वाब भी करवट लेने लगे हैं....
जिन ख्वाबों को मैं ख़ुद सुलाने था चला...
एक अरसे से आज मुस्कुराने को दिल चाहा....
एक अरसे से आज कुछ गुनगुनाने को दिल चाहा.....
मुद्दत बाद लगा की जिंदगी अभी भी बाकी है.....
एक अरसे बाद हमने खुदा से कुछ अपने लिए मांगा है....
अश्क तो पहले भी थे पलकों पर....
पर उन अश्कों में दिल डूबा डूबा सा रहता था...
चेहरा तो आज भी भीगा है अश्कों से...
पर आज एक अरसे बाद आईने ने मुझे फ़िर से हसीं बताया है...
Friday, July 4, 2008
तेरा जिक्र....
आज जब तेरा जिक्र चला....
तो तुझसे जुड़ी हर बात याद आने लगी...
दिल की अँधेरी हो चुकी गलियों मे जैसे...
तू फ़िर से शमा जलने लगी...
रूठ चुकी थी जो बहार हमसे....
फ़िर यादों के गुलशन महकाने लगी...
जिन बातों को एक अरसे से लगा था मैं भुलाने की जुगत में...
एक एक करके चलचित्र सी चली जाने लगी....
याद आ गया मेरा वो...
एकतरफा तुझसे प्यार...
मेरी प्यार भरी मिन्नत तुझसे ...
और तेरी वो दुत्कार...
मेरा राहों मे इन्तजार करना...
और मुझे देखकर तेरा रास्ता बदल देना...
पर जाने क्यूँ मुझे अपने प्यार पे इतना था भरोसा...
की हर बार लगता की ये भी है तेरी कोई अदा...
और फ़िर एक दिन मेरे सब सपने रुसवा हुए...
जब आप अपनी मंजिल की तरफ़ चल दिए...
जनता हूँ अब इन बातों को भूलने में ही सबका भला है...
पर इस दिल को आज भी खुदसे गिला है....
Tuesday, July 1, 2008
वक्त....
जिस मोड़ पे बरसों तेरी मैंने रह ताकि थी....
ये वक्त ही ही तो है ....जो.....
आज मैं तुझे नही दे सकता, और जो कल तू मुझे न दे सकी थी....
तेरा साथ पाना तो मेरी दिली ख्वाहिश थी....
पर ये बात तुझे उस वक्त नागवार गुजरी थी...
और आज जब मैं चाह के भी तुम्हारा साथ नही दे सकता...
तुम सामने खड़ी हो और कह रही हो की वो मेरी मज़बूरी थी....
क्यों हम वक्त रहते कोई बात समझ नहीं पाते है...
और मौका हाथ से जाने के बाद अक्सर उसे वापस चाहते हैं...