ये न गवारा था मुझे ...
और उसने हर वफ़ा की ...
कोई न कोई शर्त रखी थी ....
"Love is the thing which is grace of god, and few peoples gets it... u r the most lucky person if someone loves you, however, this world is full of fake... people are cheating in name of love to each other...." so be careful while you love someone kyunki "pathrili hai ye rah aur chikni bhi, jane koun kab fisal jae aur koun kab jakhmi.... ehtiyat hi hai behtarin nuskha... andhe hoke pyar kiya jaye ye duniya us kabil nahi"
वो कहतें रहे , प्यार लफ्जों का मोहताज नही होता.....
और हम इकरार उनके लबों से सुनने की हसरत में रहे....
पर वोह ख़ामोशी से जो बात कह गए....
हम ताउम्र भी वोह बात अपने लबों से न कह पाए....
जो एक जर्रा-ऐ-लम्हा में वो कर गए.....
हम तमाम कोशिशों के बावजूद भी न कर पाए.....
ये तो दुआ है लोगों की , की साँसे आ जा रही है....
वरना उसने तो कोई कसर नहीं रखी है....
लोग कहते है ज़िंदा हूँ मैं....
पर हकीक़त तो यह है की जान तो उनमें ही अटक रखी है...
वाद :- एक कमी थी ताज-महल में...हमने तेरी तस्वीर लगा दी....
आपने झूठा वादा करके....आज हमारी उम्र बढादी.....
तेरी गली में सजदा करके....हमने इबादतगाह बना दी॥
परिवाद :- आपके दिल में लगवानी थी जो...वो तस्वीर ताज-महल में लगवा दी....
आपने जिसे झूठा कहा, हमने उसपे जान गँवा दी....
मेरी गली को इबादतगाह बना के...खुदा से अदावत करा दी...
वाद :- ऐसे बिछड़े रात के मोड़ पर....आखिरी हमसफ़र रास्ता रह गया....
परिवाद :- चलते रहा ता-उम्र साथ मैं....सबने रास्ता ही कहा, हमसफ़र नही....
वाद :- और तो आशिकी में क्या मिलता...अपनी हस्ती भी छीन गयी मुझसे....
परिवाद :- फ़ना हो जाये कायनात जिसमें ये आशिकी का जलाल है...
किसी को तख्तो ताज खोने का गिला है, किसी को हस्ती का मलाल है....
वाद :- मैं जिसके आख का आंसू था...क़द्र न की उसने...बिखर गया हु अब तो धुल से उठा रहे है मुझे....
परिवाद :- भर भर आती थी ग़म से आँख तो भी न गिरने दिया, एक अरसे से मिली ख़ुशी तो तुझे न संभाल पाया...
ख़याल १ :- सोच कर आओ कु-ऐ-तमन्ना, जान-ऐ-मन जो यहाँ रह गया, रह गया...
उनकी आखों में कैसे छलकने लगा, मेरे होठों पे भी माजरा रह गया....
ख़याल 2 :- रकीब बन गयी दुनिया, मेरी आखों में जो अक्स उनका दिख गया....
मेरे जीते जी तो न समझ सके मुझे, फिर ता-उम्र मेरा जिक्र ही काम रह गया.....
ख़याल ३:- कागज की कश्ती थी पानी का किनारा था...खेलने की मस्ती थी...दिल भी आवारा था...
कहाँ से आ गए इस समझदारी के दलदल में, बचपन का वो वक़्त कितना प्यारा था....
ख्याल ४ :- लम्हा दर लम्हा उम्र गुजर जाती है...किनारे खो जाते है कश्तियाँ डूब जाती है....
हम जिनकी यादों के सहारे आज ताज जी रहे है, खुदा जाने उन्हें हमारी याद भी आती है??
तेरे लिए कुछ भी कर जाऊं वोह कम है....
तेरी एक मुस्कान के लिए जो भी कीमत चुकाऊं कम है.....
एक जनम में क्या होगा तेरा साथ पाके....
तेरे साथ सात सौ जनम भी भी पाऊं तो कम है.....
आजकल कुछ बन सँवारने लगे है.....
जबसे एहसास हुआ है की वो देखते है हमे.....
आइना भी हैरान है हमसे.....
की अचानक कुछ वक्त देने लगे है उसे.....
हो जाते हो खफा तुम तो, बोझिल सी हो जाती है जिंदगी...
पास होते हो तुम तो खिल सी जाती है ज़िन्दगी...
लोग कहते है, मैं उदास होके अच्छा नही लगता....
पर तेरी नाराजगी को भी तो पचा नही पाती जिंदगी....