Friday, November 13, 2009

पिछली रात...

यूँ काटी है पिछली रात...
जैसे एक उम्र काटी है....
हर पल में बस ये ही गिना....
तेरी अगली झलक में कितने पल बाकी है.....

Tuesday, September 15, 2009

महफ़िल....

शिरकत से तेरी, कुछ पल महफ़िल बन जाती है ज़िन्दगी...

वरना तो विराना, चहलकदमी करता है यहाँ.....

दो पल की गुफ्तगू भी तुझसे, दिल बहला देती है.....

वरना ग़मों की शाम, ही नही ढलती यहाँ....

Wednesday, September 2, 2009

तेरी आदत.....

तेरा ख़त इस बात की गवाही है....

की तुझे मेरी याद तो है.....

लगा जैसे की तुझे एहसास तो है...

की तेरे बिना आज भी कोई बरबाद है....


मेरी निगाहों में आज भी तेरी ही सूरत है...

मेरे दिल में आज भी तेरे लिए वो ही सीरत है....

भले ही तू दूर हो गई हो मुझसे...

लेकिन मुझे आज भी तेरी आदत है....


जी रहा हूँ उसी लम्हे में....

जिसमे तुमने मुझे छोड़ा था....

लोग कहते है वो गुजर गया.....

हमे यकीं है ये तुम्हारी शरारत है....

Thursday, August 27, 2009

हाल-ऐ-आइना....

हैरान है वो मुझे देखकर....
गोया की मैं मिला ही न हूँ कभी ....
औरों को क्या तोहमत दूँ मैं....
जब ये हाल-ऐ-आइना है.....

जाने कहाँ खो गई...
जो निशानियाँ थी मेरी....
वोह मुस्कुराता चेहरा.....
जैसे अब कहीं ना है....

Tuesday, August 25, 2009

कहते है इश्क जिसे...

मुक़्क़दस-ऐ-अजीम है जो...
हौसला है ख़ुद में जो....
जिसने दिल से लगाया इसे...
वोह मर के भी दिलों में रहता है....

है बेपनाह दर्द है इसमें...
पर न कोई जिसकी दवा है...
कहते है इश्क जिसको....
लोग कहतें है हमे हुआ है....

इत्मिनान नही मिलता तब तक...
जब तक दीदार न हो उनका...
ये सब कहने की बातें है यारो...
उनकी सूरत से कब दिल भरा है...

Friday, August 14, 2009

अमानत....

तेरे साथ गुजरा हर पल....

चाहता हूँ एक बार फ़िर उन्हें जिलूं....

कर न सकूँ गर ऐसा तो उसे....

चाहता हूँ की अपनी अमानत-ऐ-हयात बनालू...

अतीत.....

मिले आज फ़िर तुमसे तो.....

अतीत का एक पन्ना जैसे फ़िर खुल गया....

लगा की जैसे जो कहीं छुट गया था मुझसे.....

आज मुझे फ़िर से मिल गया.....

दुआ....

ख़ुद के लिए मौत भी मांगो तो नही मिलती.....

लोग कहते है...उन्हें हमारी दुआओं से जिंदगी मिली है....

Monday, July 27, 2009

तेरे ख्वाब....

होती है जब पास तू ख्वाबों में भी...

जैसे जन्नत मिल जाती है ....

तुझे मुझसे जुदा करने....

जाने क्यों रोज़ सुबह हो जाती है...

जानता हूँ ख्वाब तेरा....

बस एक छलावा है...

पर फ़िर भी तुझे बार बार देखने....

पलकें ख़ुद बखुद जुड़ जाती है.....

Saturday, July 25, 2009

तनहा सफर...

खुश नही होता हूँ मैं आजकल, तुझे खुश देखकर....

जबकि तेरी खुशी में ही मेरी खुशी थी कभी.....

हार जाता हूँ मैं अक्सर आजकल, जहाँ जितने की आदत थी मुझे...

शायद इसलिए की तू जो मेरे साथ नही है....

ज़माना रुसवा हो जाता जो हम मिल जाते....

बस इतनी सी बात ने हमारी राहें बदल दी......

है ये सच की ये फासले मैंने ही पैदा किए है....

पर यूँ अलग अलग राहों पे चलने की हिम्मत न कल थी, न आज भी है...

जख्म....

कभी कभी कुछ बातें गहरे जख्म दे जाती है....

और कभी कभी कुछ बातों से ही जख्म सिल जातें है...

कभी कभी ये जख्म ताउम्र नही सिल पाते...

और कभी जख्म सिल जाते है, पर निशाँ रह जातें है...

बस तू ही...

तू है आस पास हर पल मेरे...

बस खुली आंखों से नज़र नही आती है...

चलता हूँ मैं आखें बंद करके आजकल...

क्यूंकि आँखें खोलते ही तू चली जाती है...

चांदनी रात...

निकला न करो बेपर्दा चांदनी रातों में,

ये चाँद दिलफेंक है, इश्क कर बैठेगा....

खुलेआम कोई आपका दीदार करें...

इस दिल को कैसे गवारा गुजरेगा...

Thursday, July 23, 2009

फलसफा...

बस वो ही फलसफा है मेरी जवानी का....

बस वो ही सबब है मेरी जिंदगानी का....

वो दावा करते है आंखों से दिल का हाल जानने का....

पर सबब नही जानते मेरी आंखों के पानी का....

Tuesday, July 21, 2009

नवजात हसरतें....

तुने देखा बस एक नज़र, हम दिल कुर्बान कर बैठे....

तेरी बे-इरादा मुस्कान पे, क्या क्या गुमान कर बैठे....

बेखबर तेरी आरजू-ऐ-दिल से,

हम गुम अपना ईमान कर बैठे.....

अब खता-ऐ-इश्क जो की है....

जो सज़ा होगी निभाएंगे...

बेखबर तल्खी-ऐ-कायनात से...

हम अपनी नवजात हसरतें जवान कर बैठे.....

Monday, July 20, 2009

बीते लम्हे...

बीते लम्हों की जब याद आती है....

ये पलके ख़ुद बखुद ही भर आती है...

जब भी याद करता हूँ किसी अपने को...

तेरी सूरत ही सामने आ जाती है....

तमाम कोशिशे करके देखली ...

तुझे भुलाने की हमने....

पर जब भी ये पलके जुड़ जाती है....

तू ही सामने आ जाती है....

वादा लिया था तुमने....

की सदा मुस्कुराएंगे हम....

हम भी शिद्दत से वादा निभाना चाहते है पर...

ज्यादा मुस्कुराने की कवायद में भी ये आँखें भर आती है....

इत्तेफकान...

रश्क होता है उसकी किस्मत पे....

जिसे तू इत्तेफाक़न ही मिल गई....

सोचता हूँ मैं बैठके ये ...

मेरी कोशिशों में कहाँ कमी रह गई....

Tuesday, July 14, 2009

गुमान....

लोग कहते है....चलता हूँ मैं आजकल जरा इतराकर...
तुम ही कहो...किसे तुम्हे पाते कर गुमान नही होगा....
हर दिल की ख्वाहिश होती है...एक हसीं हमसफ़र....
पर हर दिलवाला..मुझ जेसा खुशनसीब थोड़े ही होगा....

हबीब.....

वो आए मेरी जिंदगी में....

और यूँ शरीक हो गए....

हबीब थे जो मेरे सरे...

सारे रकीब हो गए....

बे-मक़सद...

बे-मकसद जी रहे थे, तुमसे मिलने से पहले...
बे-आरजू जी रहे थे, तुमसे मिलने से पहले....
अब तो तेरे बिना १-१ साँस दुश्वार हो गई...
जाने केसे सांसे लेते रहे, तुमसे मिलने से पहले....