Monday, April 12, 2010

jaaga soya.....

जग तो गया हूँ पर आँखें अभी भी मुंदी है....
एक हसीं ख्वाब से पलके अभी तक जुडी है.....
काश की मैं आँखें खोलूं और तू सामने हो....
अगर ऐसा न हो पाए तो सुबह ही न हो....

2 comments:

Apanatva said...

nice one duaa hai jo chaho mile .

RAJNISH SARDANA said...

Gajhab hai Sir Ji...........