Friday, July 4, 2008

तेरा जिक्र....

आज जब तेरा जिक्र चला....

तो तुझसे जुड़ी हर बात याद आने लगी...

दिल की अँधेरी हो चुकी गलियों मे जैसे...

तू फ़िर से शमा जलने लगी...

रूठ चुकी थी जो बहार हमसे....

फ़िर यादों के गुलशन महकाने लगी...

जिन बातों को एक अरसे से लगा था मैं भुलाने की जुगत में...

एक एक करके चलचित्र सी चली जाने लगी....

याद आ गया मेरा वो...

एकतरफा तुझसे प्यार...

मेरी प्यार भरी मिन्नत तुझसे ...

और तेरी वो दुत्कार...

मेरा राहों मे इन्तजार करना...

और मुझे देखकर तेरा रास्ता बदल देना...

पर जाने क्यूँ मुझे अपने प्यार पे इतना था भरोसा...

की हर बार लगता की ये भी है तेरी कोई अदा...

और फ़िर एक दिन मेरे सब सपने रुसवा हुए...

जब आप अपनी मंजिल की तरफ़ चल दिए...

जनता हूँ अब इन बातों को भूलने में ही सबका भला है...

पर इस दिल को आज भी खुदसे गिला है....

2 comments:

seema gupta said...

याद आ गया मेरा वो...
एकतरफा तुझसे प्यार...
मेरी प्यार भरी मिन्नत तुझसे ...
और तेरी वो दुत्कार...
मेरा राहों मे इन्तजार करना...

" ah, too painful, good creation"

advocate rashmi saurana said...

आज जब तेरा जिक्र चला....
तो तुझसे जुड़ी हर बात याद आने लगी...
दिल की अँधेरी हो चुकी गलियों मे जैसे...
तू फ़िर से शमा जलने लगी...
bhut hi sundar paktiya. sundar bhav ke sath likhi gai hai. very good.