Wednesday, May 27, 2009

काश...

काश की बातों से दिल के जख्म सिल पाते....

काश की दुनिया मे सब चाहने वाले मिल पाते....

फ़िर यूँ न होती ये दुश्वारियां-ऐ-मोहब्बत....

पर सोचो क्या फ़िर इश्क में यूँ रोमान्चियत पाते.....

1 comment:

surendra said...

waah kya baat hai bhai............