Friday, July 6, 2012

bhukh....

bahut purani kathani hai...
Bhukhe bhajan na hoi gopala....
Kuch nahi sohe man ko tab tak...
jab tak Pet me na jae nivala.... 


Sab ne milke mara use....
Mehfil me jis bhukhe ne 2 rotiya churali....
Jashn tha ye chitrakar ka...
Jisne ek bhukhe ki tasveer lakhon me bech dali.... 


Daan ke naam pe
mandiro me lakho de aate hai...
Par bukha garib mil jae to use najar andaj kar aate hai....
Hota hai koi avsar to bahut pakvan banate hai....
Par bhukhe ke hisse wo tab aata hai, jab pakwan sad jate
hai....

4 comments:

amit kalantri said...

http://www.facebook.com/photo.php?fbid=310818198940618&set=a.152310818124691.26905.100000373208953&type=3



BHUKH .... अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये "रोटी "
~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@
___ क्या क्या मजे नहीं दिखाती है आदमी को ये रोटी_खाए जो इसे तो पेट आदमी का भर देती है ये रोटी
___ तवायफें जो नाचती है रईसों के लिए बाँध घुंघुरू कोठों पे_ वो कहाँ नाचें दोस्तों नाच तो उन्हें नचाती है ये रोटी
___ ना जाने कैसे कैसे पाप आदमी से कराती है ये रोटी _ अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये रोटी
___ सच कहा है किसी फकीर ने भूखे पेट भजन न होए गोपाला ये ले तेरी _कंठी माला कैसे राम-और रहीम को भी भूलव़ा देतीं है ये रोटी
___ कपडे किसी के लाल करवाती है बाल किसी के लम्बे करवाए ये रोटी_ किसी बच्चे से तमाशा रास्तों पे करवा लेती है ये रोटी
___ चोरी-चकारी -खून खराबा - दंगे तक करवा देती है ये रोटी_ साधू -फकीर से भी क्या खूब झूठ बुलवा लेती है ये रोटी
___ दुनिया में नेकी और बदी दोनों पर हुकुम चलाये ये रोटी_ पल में राजा और पल में रंक इन्सान को बना दे ये रोटी
___ मुझको तो चाँद -सूरज -शेर-गजल -सुख-दुःख कुछ भी न दीखता है_ मोटि हो या पतली कच्ची हो या पक्की हो को दिखती हैं सिर्फ ये रोटी
@@@ सिर्फ ये रोटी ~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@ —

amit kalantri said...

अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये "रोटी "
~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@
___ क्या क्या मजे नहीं दिखाती है आदमी को ये रोटी_खाए जो इसे तो पेट आदमी का भर देती है ये रोटी
___ तवायफें जो नाचती है रईसों के लिए बाँध घुंघुरू कोठों पे_ वो कहाँ नाचें दोस्तों नाच तो उन्हें नचाती है ये रोटी
___ ना जाने कैसे कैसे पाप आदमी से कराती है ये रोटी _ अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये रोटी
___ सच कहा है किसी फकीर ने भूखे पेट भजन न होए गोपाला ये ले तेरी _कंठी माला कैसे राम-और रहीम को भी भूलव़ा देतीं है ये रोटी
___ कपडे किसी के लाल करवाती है बाल किसी के लम्बे करवाए ये रोटी_ किसी बच्चे से तमाशा रास्तों पे करवा लेती है ये रोटी
___ चोरी-चकारी -खून खराबा - दंगे तक करवा देती है ये रोटी_ साधू -फकीर से भी क्या खूब झूठ बुलवा लेती है ये रोटी
___ दुनिया में नेकी और बदी दोनों पर हुकुम चलाये ये रोटी_ पल में राजा और पल में रंक इन्सान को बना दे ये रोटी
___ मुझको तो चाँद -सूरज -शेर-गजल -सुख-दुःख कुछ भी न दीखता है_ मोटि हो या पतली कच्ची हो या पक्की हो को दिखती हैं सिर्फ ये रोटी
@@@ सिर्फ ये रोटी ~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@ —

amit kalantri said...

अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये "रोटी "
~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@
___ क्या क्या मजे नहीं दिखाती है आदमी को ये रोटी_खाए जो इसे तो पेट आदमी का भर देती है ये रोटी
___ तवायफें जो नाचती है रईसों के लिए बाँध घुंघुरू कोठों पे_ वो कहाँ नाचें दोस्तों नाच तो उन्हें नचाती है ये रोटी
___ ना जाने कैसे कैसे पाप आदमी से कराती है ये रोटी _ अच्छे-बुरे सभी कमाल आदमी से करवाती है ये रोटी
___ सच कहा है किसी फकीर ने भूखे पेट भजन न होए गोपाला ये ले तेरी _कंठी माला कैसे राम-और रहीम को भी भूलव़ा देतीं है ये रोटी
___ कपडे किसी के लाल करवाती है बाल किसी के लम्बे करवाए ये रोटी_ किसी बच्चे से तमाशा रास्तों पे करवा लेती है ये रोटी
___ चोरी-चकारी -खून खराबा - दंगे तक करवा देती है ये रोटी_ साधू -फकीर से भी क्या खूब झूठ बुलवा लेती है ये रोटी
___ दुनिया में नेकी और बदी दोनों पर हुकुम चलाये ये रोटी_ पल में राजा और पल में रंक इन्सान को बना दे ये रोटी
___ मुझको तो चाँद -सूरज -शेर-गजल -सुख-दुःख कुछ भी न दीखता है_ मोटि हो या पतली कच्ची हो या पक्की हो को दिखती हैं सिर्फ ये रोटी
@@@ सिर्फ ये रोटी ~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@~~~~~~~~@ —

vishnu-luvingheart said...

thanks Amit for ur comments